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Who is a Magic Author?

A magic author is one whose writing:   I nspires a couch potato to think about doing something with his life   M itigates the pain of a broken heart   M otivates armchair activists to roll up their sleeves and get in to the ground   O bsesses the mind with a pressing thought to act immediately rather than analysing endlessly   R esonates with positive thoughts and helps a depressed soul   T riggers passion in a mechanical life   A ssists an ignorant and naive mind   L ives in the heart and mind of the masses, forever

Diwali Celebrity Author Giveaway - 2019 (CLOSED)

Are you ready to become the celebrity author? We want to make digital publishing WAY more fun. And hence i n collaboration with  InVideo  and  Knovator , we are giving away tons of incredible tools to make you a celebrity! One super-lucky author will be taking home ₹50,280 worth of prizes. And even if you don't win, we have a special surprise planned for everyone who enters! Who Will Love This Giveaway: Writers… Book lovers… Editors… Illustrators... Publishers... Marketers… Digital Agencies… Freelancers... Startup Founders… Solo Entrepreneurs… What You'll Win: InVideo : One full access to the Business account for 1 year (Value: ₹12,780) Creating a book teaser or promo video? Video walkthroughs? Tutorials? Use InVideo to create and edit all your video projects! Knovator : 25% discount on services related to website building using advanced technologies and frameworks like ReactJS/NodeJS (Value: ₹25,000)* * The value is derived by assuming the total cost of the website ...

मेरे वो दिन।

  आज प्रिया और पंकज के प्रेम को देखकर मुझे मेरे बीते हुए जीवन की यादें फिर से ताजा हो गई। वैसे आजकल के आधुनिक सभ्यता को देखते हुए मन थोड़ा सा घबरा जाता है । जब कि बचपन से लेकर ही बच्चों को अपना पसंद, नापसंद करना और खुद के हिसाब जीवन जीना जैसी अमूल्य छूट प्राप्त है और घरवाले भी अब बच्चों को सहयोग करने लगे हैं। वैसे आजकल लड़कियां भी हर क्षेत्र में नाम कमा रही है, चाहे वो खेल से लेकर, सैन्य सेवा हो हर क्षेत्र में अपना सहयोग कर रही है। बचपन से लेकर मै और मेरी दो सहेलियां, कमला और सीमा, हम तीनों ही सबसे अच्छी तालमेल के साथ रहते थे। और हम तीनों की दोस्ती पूरे गांव में प्रसिद्ध थी। हम सहेलियां जिधर भी जाते साथ में ही रहते थे।  मै मेरे परिवार में दादा- दादी, मां- पिता जी,चाचा - चाची और मेरा भाई सूरज, पूरा भरा परिवार था। बचपन का बच्चों की तरह गुजर जाना, हमको तो यह लगता है कि जैसे हम कभी बच्चे थे ही नहीं। फिर भी जितना हो सकता था एक लड़की होकर मै मेरे सहेलियों के साथ पूरा बचपन बड़े मौज- मस्ती से बिताया । उन्हीं के साथ पनघट से पानी भरना, उन्हीं के साथ राजा- रानियों के किस्से सुनना और फिर ...

दुष्कर्म एक खतरनाक सामाजिक बुराई, ऐसे हो सकती है खत्म !

  सत्यम कुशवाह की कलम से..... दुष्कर्म एक खतरनाक सामाजिक बुराई है, जो किसी प्रदर्शन और किसी के द्वारा किसी पर आरोप मड़ने से खत्म नहीं होगी, इसे खत्म करना है तो हमें यानी देश और दुनिया के तमाम इंसानों को अपनी सोच बदलनी होगी। इसकी शुरुआत हर घर से होगी। जब युग बदलेगा तब हम बदलेंगे ऐसा सोचने से कुछ नहीं होने वाला है, इसकी जगह जब हम बदलेंगे तब युग बदलेगा की सोच लानी होगी। अच्छी सोच के लिए किसी भी व्यक्ति में अच्छे संस्कार का होना, उसका अच्छा खान-पीन होना, खाली दिमाग न होना होना जैसी चीजें आवश्यक हैं। हमारे धर्म शास्त्रों में एक श्लोक है " यस्य पूज्यंते नार्यस्तु, तत्र रमंते देवता !!” यानी जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। दुष्कर्म(बलात्कार) जैसी खतरनाक सामाजिक बुराई को खत्म करना है तो हर एक घर से इसको खत्म करने का अभियान चलाना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाने चाहिए। लोगों में महिला सम्मान की भावना जागनी चाहिए। अब हाय, हैलो के जमाने में ये सब खत्म हो रहा है और हाय हाय हो रही है। चरण स्पर्श जैसे संस्कार आधुनिकता की भेट चढ़ रहे हैं, इन घटनाओं के पी...

कभी न हिम्मत हार .....

  क्या   हुआ   जो   तू   हार   गया   ,     जान   की   हार   तुझे   क्या   सीखा   गया   ,     पहनेगा   कभी   तू   भी   जीत   का   हार ,     कभी   न   हिम्मत   हार।       यह   तो   इस   दुनिया   का   वसूल   है   ,     हार   के   बाद   ही   जीत   का   सुकून   है   ,     करेगा   तू   भी   एक   दिन   नैया   पार   ,     कभी   न   हिम्मत   हार।       कह   गए   है   श्री   कृष्णा   गीता   में ,     पूरा   सार   है   कर्म   के   योग   में ,     बहाता   रह   कर्म   की   धार ,     कभी   न   हिम्मत   हार।       चार   लोगो   के ...